मेरी नई कविता !!!
कुछ ख़्वाब दबे से दिल मै
और कुछ आँखों से बयान न हो
तब धडकता है जो दिल
उससे सर्जन होता शब्दों का !
कुछ होठो तक आते है और कुछ
बाकि वहीं धड़कन बन के रह जाती है
और कुछ कविता बन जाते है !
लोग अर्थ खोजते है उनमे
कुछ पढ़ के प्रसन हो जाते है
मै वही हूँ -जहां था फिर भी
और नये शब्द ढूंढ़ता हूँ
और अर्थ भी - और मेरी नई कविता !
कुछ ख़्वाब दबे से दिल मै
और कुछ आँखों से बयान न हो
तब धडकता है जो दिल
उससे सर्जन होता शब्दों का !
कुछ होठो तक आते है और कुछ
बाकि वहीं धड़कन बन के रह जाती है
और कुछ कविता बन जाते है !
लोग अर्थ खोजते है उनमे
कुछ पढ़ के प्रसन हो जाते है
मै वही हूँ -जहां था फिर भी
और नये शब्द ढूंढ़ता हूँ
और अर्थ भी - और मेरी नई कविता !
अरुण तिकू
२४ दिसंबर २०१४