Sunday, 28 December 2014

मेरी नई  कविता !!!

कुछ  ख़्वाब दबे से दिल मै 
और कुछ आँखों  से बयान न हो 
तब  धडकता है जो दिल 
उससे  सर्जन होता शब्दों का  !


कुछ होठो  तक आते है और कुछ 
बाकि  वहीं  धड़कन  बन के रह जाती है 
और कुछ कविता बन जाते है !

लोग  अर्थ  खोजते है उनमे 
कुछ  पढ़ के  प्रसन  हो जाते है 
मै  वही हूँ  -जहां  था  फिर भी 
और नये शब्द  ढूंढ़ता  हूँ  
और अर्थ भी - और मेरी नई  कविता !
अरुण तिकू
२४ दिसंबर २०१४ 

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