Sunday, 22 December 2019

दूर तक फैला शांति स्थल
हेमंत का आगमन
शिखर-
निर्बन्ध बहता मंदवात
तरुवर
और मैं अकेला!
मेरे अनुभव पटल को छू जाता हैं
शरद का अहसास
मैं समझ पाता हूँ-
जीवन क्यों हैं
और होना चाहिए क्यों सतत्
अकेला!
अरुण तिकू
नागपूर
18 दिसंबर 2019

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